लाइब्रेरी
फ़िल्मों ने बड़ा बदनाम किया, लड़का और लड़की की दोस्ती को ऊपर से बेकरी या कॉफ़ी शॉप में जो घूरते रहते हैं, दुपट्टा भी शर्मा जाए | हमारी दोस्ती एक एनजीओ के प्रोग्राम से शुरू हुई । वो मुझसे छोटा था... पर बहुत समझदार । हम अक्सर लाइब्रेरी में मिलते थे, किताबे पढ़ते थे । और फिर लाइब्रेरी से जुड़े एक कॉफी शॉप में बैठ, खूब सारी बातें करते थे । हर हफ्ते लाइब्रेरी और घर के बीच ये मुलाकात बढ़ने लगी । एक दिन उसने पूछा, कितना अच्छा होता अगर हम ऐसे ही मिलते रहे । साल बीत गए...हम अपने-अपने रास्ते चल पड़े । और आज उसको जवाब देने का मन करता है । हा.. बहुत अच्छा होता । बिन मतलब के मिलते रहना । और किताब पढ़ना .. Note: This is written on the prompt by Garima Mishra ji at the May 19 Bansa Hindi Writing Program. Thank you for helping with the edits too, Garima ji.